भारत में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और इसी के साथ 1 मार्च से देश में प्री-मानसून सीजन की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। यह समय आमतौर पर मार्च से लेकर मई के अंत तक रहता है, जब धीरे-धीरे गर्मी बढ़ती है और कई राज्यों में मौसम अचानक करवट लेता है। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। बसंत ऋतु का समय कम हो रहा है और गर्मी पहले ही दस्तक दे रही है।
प्री-मानसून सीजन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति अलग-अलग रहती है। कहीं तेज गर्मी और लू का असर देखने को मिलता है तो कहीं धूल भरी आंधियां, गरज-चमक और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं सामने आती हैं। खासकर उत्तर, पूर्व और मध्य भारत में इस दौरान मौसम काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। किसानों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण होता है क्योंकि अचानक आने वाले तूफान और बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
प्री-मानसून सीजन क्या होता है और क्यों बढ़ रही है गर्मी
प्री-मानसून सीजन वह समय होता है जब सर्दी का असर पूरी तरह खत्म हो जाता है और मानसून आने से पहले गर्मी तेजी से बढ़ने लगती है। यह अवधि आमतौर पर मार्च, अप्रैल और मई के महीनों में रहती है। इस दौरान सूरज की किरणें अधिक तेज होती जाती हैं, जिससे दिन का तापमान लगातार बढ़ता है। मौसम विभाग के अनुसार इस समय देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रिकॉर्ड किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन भी इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बसंत ऋतु का समय कम हो गया है और गर्मी जल्दी शुरू हो जाती है। इसका असर खेती, पानी की उपलब्धता और जनजीवन पर पड़ता है। शहरों में हीट वेव का खतरा बढ़ जाता है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी और फसल नुकसान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए प्री-मानसून सीजन को मौसम के बदलाव का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।
मार्च से मई के बीच मौसम का बदलता मिजाज
मार्च के महीने से ही तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू हो जाती है और महीने के दूसरे हिस्से में कई राज्यों में गर्मी का असर साफ दिखाई देने लगता है। खासकर उत्तर-पश्चिम भारत जैसे राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना रहती है। जैसे-जैसे अप्रैल और मई का महीना आता है, गर्मी और अधिक तेज हो जाती है और दिन में तेज धूप लोगों को परेशान करने लगती है।
इसी दौरान मौसम में अस्थिरता भी बढ़ जाती है। कई जगह अचानक तेज आंधी, बिजली चमकने और ओलावृष्टि की घटनाएं देखने को मिलती हैं। यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है क्योंकि खेतों में खड़ी फसल को नुकसान होने का खतरा रहता है। साथ ही तेज हवाओं और धूल भरी आंधियों के कारण शहरों में प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
पूर्वी भारत में काल वैसाखी तूफान का खतरा
प्री-मानसून सीजन के दौरान पूर्वी भारत के कई राज्यों में काल वैसाखी तूफान का खतरा बढ़ जाता है। यह एक प्रकार का तेज आंधी-तूफान होता है जो अचानक आता है और तेज बारिश, बिजली गिरने तथा तेज हवाओं के साथ काफी नुकसान पहुंचा सकता है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में यह घटना अक्सर अप्रैल और मई के महीनों में देखने को मिलती है।
काल वैसाखी तूफान की वजह से कई बार पेड़ गिर जाते हैं, बिजली की लाइनें टूट जाती हैं और फसलों को भी भारी नुकसान होता है। किसानों के लिए यह समय काफी संवेदनशील माना जाता है क्योंकि अचानक आने वाले तूफान से खेतों में लगी फसल प्रभावित हो सकती है। हालांकि कुछ मामलों में हल्की बारिश से गर्मी से राहत भी मिल जाती है, लेकिन तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं जोखिम बढ़ा देती हैं।
उत्तर भारत और बिहार में शुष्क मौसम का असर
उत्तर भारत के कई हिस्सों में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में आने वाले दिनों में बारिश की संभावना कम बताई जा रही है। इस दौरान तेज धूप और सूखी हवाओं के कारण दिन का तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा। सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक महसूस हो सकती है, लेकिन दिन में गर्मी का असर साफ दिखाई देगा।
तेज हवाओं के कारण कुछ शहरों में प्रदूषण के स्तर में कमी भी देखने को मिल सकती है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलते हवा की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है। हालांकि बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में दिन के समय तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है। इसलिए इस दौरान पर्याप्त पानी पीना और धूप से बचाव करना जरूरी माना जाता है।
राजस्थान, मध्य भारत और दक्षिण भारत का मौसम
राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगा है। जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर जैसे जिलों में तापमान पहले ही 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में यह और बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विदर्भ व मराठवाड़ा क्षेत्रों में भी तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो गर्मी के बढ़ते असर को दर्शाता है।
दक्षिण भारत की बात करें तो यहां का मौसम अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बताई गई है, जबकि बाकी क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने की उम्मीद है। वहीं होली के आसपास उत्तर भारत में तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। यानी इस बार त्योहार के दौरान मौसम गर्म जरूर रहेगा, लेकिन रंग और पानी के साथ त्योहार मनाने के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
Disclaimer: यह लेख मौसम से जुड़ी सामान्य जानकारी और विभिन्न मौसम रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। मौसम की स्थिति समय और स्थान के अनुसार बदल सकती है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले आधिकारिक मौसम विभाग या स्थानीय प्रशासन की ताज़ा जानकारी अवश्य देखें।









